वो दर्द ही तो है, बस कहीं कहा तो नहीं ,
वो बहा नहीं, तो क्या उसका कोई नाम नहीं ?
वो लकीरें है हाथो में और कुछ भी तो नहीं ,
वो जिन्दगी, कहीं मौत का एक अंदाज़ तो नहीं ?
-कबीर
Wednesday, July 08, 2009
Friday, June 12, 2009
...खुशी...गम...
वो खुशी तेरी थी, तेरी हुई, चली गई,
वो अशक मेरे थे, बहे फिर ठहर गए;
अब क्यों खुशी को बुलाये जो हुई पराई?
क्यों गम को सताए जो है बस हमसाये ?
-तुषार
Wednesday, June 10, 2009
...गम...दिल ...
तू गया, तेरा गम भी एक दिन यूँ चला जाएगा,
कोई कहाँ रुका है जो यह मौसम ठहर जाएगा
वो बरसा तो दिल भी कहीं गीला भीगा हो जाएगा
वो सूख गया तो दिल भी बस पत्थर हो जाएगा .
-तुषार
Wednesday, June 03, 2009
ये रात अकेली लगती है ...
ये रात अकेली लगती है ,
वो चाँद तन्हा जगता है ;
न कोई अपना मिलता है ,
न कोई पराया दीखता है ;
वो दिन मैं चेहरे लड़ते है ,
और रात में डर सा लगता है ;
वो कहीं बिछडा जाता है ,
यह हाथ खाली रहता है ;
वो ऊचे मकान में जीता है ,
कहीं घर खाली बैठा है ;
यह आसमान को छुता है ,
बस तारो से बातें करता है ;
वो सर्द ईमारत में हँसता है ,
मौसम से अछुता रहता है ;
वोह दिनभर भागता रहता है ,
और बस इंतज़ार में जीता है ;
वो रोज़ कुछ पाता है ,
और ख़ुद खोता लगता है ;
कहाँ अब ख़ुद से मिलता है ,
कहाँ ख़ुद को जानता है ;
कुछ अधूरे सपनो को रोता है ,
और ज़िन्दगी से शिकायत करता है ;
ये रात अकेली लगती है ,
वो चाँद तन्हा जगता है ;
-तुषार
वो चाँद तन्हा जगता है ;
न कोई अपना मिलता है ,
न कोई पराया दीखता है ;
वो दिन मैं चेहरे लड़ते है ,
और रात में डर सा लगता है ;
वो कहीं बिछडा जाता है ,
यह हाथ खाली रहता है ;
वो ऊचे मकान में जीता है ,
कहीं घर खाली बैठा है ;
यह आसमान को छुता है ,
बस तारो से बातें करता है ;
वो सर्द ईमारत में हँसता है ,
मौसम से अछुता रहता है ;
वोह दिनभर भागता रहता है ,
और बस इंतज़ार में जीता है ;
वो रोज़ कुछ पाता है ,
और ख़ुद खोता लगता है ;
कहाँ अब ख़ुद से मिलता है ,
कहाँ ख़ुद को जानता है ;
कुछ अधूरे सपनो को रोता है ,
और ज़िन्दगी से शिकायत करता है ;
ये रात अकेली लगती है ,
वो चाँद तन्हा जगता है ;
-तुषार
Monday, June 01, 2009
अन्त ...शुरुवात...
हर अन्त किसी शुरुवात से ही उपजा है,
वही शुरुवात जो उस अन्त के लिए जन्मी थी ...
वही शुरुवात जो उस अन्त के लिए जन्मी थी ...
Every end is a conclusion of a new start,
The start which commenced for that very end…
-Tushar
Thursday, May 28, 2009
night & friend ...
I have befriended moon and stars,
Talking of love and daily little wars;
They are so far yet seen and felt so near,
They always listen with smile so clear;
With night they come, with me have a stay
Till I find my dreams, through goodnight way…
-Tushar
Wednesday, May 27, 2009
Light...
I can see the dark tree, through the door, lit by moon;
But I fail to see the thought inside my heart’s room,
Waiting for love’s light to enter and fill this room,
So my soul also will be the tree from other’s room;
Away from shadows, into the peace rain …
For light and love, for innocence to retain … -Tushar
But I fail to see the thought inside my heart’s room,
Waiting for love’s light to enter and fill this room,
So my soul also will be the tree from other’s room;
Away from shadows, into the peace rain …
For light and love, for innocence to retain … -Tushar
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