ज़िन्दगी एक अजब चाहत है
जो है पास वो बस है नाम
जो नहीं ये उसकी इबादत है ...
-तुषार
Sunday, November 01, 2009
सुबह
आज सुबह कोई ख्वाब न था …
…था तो बस एक प्यारा सुकून
पता नहीं क्यों …बस अजब गीली हँसी से
पहली बार साथ आज शायद वो ख्याल भी उठा है
-तुषार
…था तो बस एक प्यारा सुकून
पता नहीं क्यों …बस अजब गीली हँसी से
पहली बार साथ आज शायद वो ख्याल भी उठा है
-तुषार
Saturday, October 24, 2009
इंतज़ार ....
न जाने लफ्ज़ कहाँ गुम हो गए,
नाम लिखने के बाद ...
कुछ भी न लिख सका उस चेहरे की कर याद ...
खली ख़त ही भेज दिया जाने किस उम्मीद के साथ ...
हर जवाब तुम हो ...आज भी है इंतज़ार ...
-कबीर का दोस्त
नाम लिखने के बाद ...
कुछ भी न लिख सका उस चेहरे की कर याद ...
खली ख़त ही भेज दिया जाने किस उम्मीद के साथ ...
हर जवाब तुम हो ...आज भी है इंतज़ार ...
-कबीर का दोस्त
ऐसे ही ...एक ख्याल
चोखट खुली आज भी है ,
आँख कुछ सुनी भी ,
घड़ी का वक्त वही है,
जहाँ शुरु हुआ था ये इंतज़ार भी ,
किताब मैं कहीं पत्ते सूखे है ,
धूल पड़ी है आईने पर ,
और कुछ बूँदें आँगन में...
...बस बरस रही है ,
दूर उसी सुखी चोखट से...
-तुषार
आँख कुछ सुनी भी ,
घड़ी का वक्त वही है,
जहाँ शुरु हुआ था ये इंतज़ार भी ,
किताब मैं कहीं पत्ते सूखे है ,
धूल पड़ी है आईने पर ,
और कुछ बूँदें आँगन में...
...बस बरस रही है ,
दूर उसी सुखी चोखट से...
-तुषार
तमन्ना ....
न इंतज़ार कोई , न है बेबसी सी
कहीं बस ख्याल उनका कुछ गुदगुदा जाता है
वो कहे न कहे कुछ हमसे , तो क्या ?
किसी तमन्ना से दिल फिर भी मुस्कुरा जाता है...
-तुषार
कहीं बस ख्याल उनका कुछ गुदगुदा जाता है
वो कहे न कहे कुछ हमसे , तो क्या ?
किसी तमन्ना से दिल फिर भी मुस्कुरा जाता है...
-तुषार
परख ...
खुश वो तो हो मैं भी
पर कब तक बस उनके लिए
परख उनको भी ऐ मेरे मालिक
बख्श उन्हें भी हँसी मेरी
-तुषार
पर कब तक बस उनके लिए
परख उनको भी ऐ मेरे मालिक
बख्श उन्हें भी हँसी मेरी
-तुषार
Monday, September 28, 2009
bye bye Jerry
Why we say good byes?
With a smile and wet eyes
Loads of wishes few said
Lot of feeling left unsaid
For wonderful journey you have
For a life you want to carve
For moments to be unfolded
For new stature to be molded
I would not say, no byes
There will be no wet eyes
Just a sweet little smile
As you head to new mile
No parting gift no farewell game
Just a promise, as I add a name
Into my life, a relation not to wane
You will live in life’s memory lane
Why we say good byes?
With smile with wet eyes
For wonderful journey you have
For a life you want to carve…
-Tushar
PS: I posted it almost after a year. Jerry left Aricent in Oct 2008
With a smile and wet eyes
Loads of wishes few said
Lot of feeling left unsaid
For wonderful journey you have
For a life you want to carve
For moments to be unfolded
For new stature to be molded
I would not say, no byes
There will be no wet eyes
Just a sweet little smile
As you head to new mile
No parting gift no farewell game
Just a promise, as I add a name
Into my life, a relation not to wane
You will live in life’s memory lane
Why we say good byes?
With smile with wet eyes
For wonderful journey you have
For a life you want to carve…
-Tushar
PS: I posted it almost after a year. Jerry left Aricent in Oct 2008
Saturday, September 26, 2009
what if ...
हर सपने का आगाज़ है एक ‘अगर’,
‘अगर’ यह हो तो बस होगा क्या ?
पर उसी का अंत होता है एक ‘मगर’,
मगर उन सपनो से ज़िन्दगी चलती है क्या ?
*********************************************
Every dream starts with “what if”
“what if “ it gets a form of being real
And then it concludes into being real
A reality that leaves only the “what if “ …
-Tushar
‘अगर’ यह हो तो बस होगा क्या ?
पर उसी का अंत होता है एक ‘मगर’,
मगर उन सपनो से ज़िन्दगी चलती है क्या ?
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Every dream starts with “what if”
“what if “ it gets a form of being real
And then it concludes into being real
A reality that leaves only the “what if “ …
-Tushar
अगर...मगर...
जिंदगी ‘अगर’ में जी लेते तो सही,
जहाँ में ‘मगर ’ होगे बहूत ;
वो साथ तो होगे हर वक्त,
तनहा पल फिर भी होगे बहूत;
कहीं कोहरे को बदल समझ बैठे,
बहना चाहते थे साथ हम भी ‘मगर’;
छट गई धुंध और खड़े रह गए दरख्त,
सालो से जैसे किसी का इंतज़ार हो बहूत ;
जिंदगी खड़ी थी उस मोड़ पर वहां,
रास्ता सीधा पहूचता था ‘मगर’,
एक काफिर ने राह यूँ मोड़ दी है कि ,
मंजिल नज़र से दूर हुई है बहूत;
अपने होने का सबब पूछ बैठा आंसू,
कह न पाए हम उस लगी को ‘मगर’,
बहा है अपने ही लहू से वो भी,
दर्द भी है, और खुशी भी बहूत;
-तुषार
जहाँ में ‘मगर ’ होगे बहूत ;
वो साथ तो होगे हर वक्त,
तनहा पल फिर भी होगे बहूत;
कहीं कोहरे को बदल समझ बैठे,
बहना चाहते थे साथ हम भी ‘मगर’;
छट गई धुंध और खड़े रह गए दरख्त,
सालो से जैसे किसी का इंतज़ार हो बहूत ;
जिंदगी खड़ी थी उस मोड़ पर वहां,
रास्ता सीधा पहूचता था ‘मगर’,
एक काफिर ने राह यूँ मोड़ दी है कि ,
मंजिल नज़र से दूर हुई है बहूत;
अपने होने का सबब पूछ बैठा आंसू,
कह न पाए हम उस लगी को ‘मगर’,
बहा है अपने ही लहू से वो भी,
दर्द भी है, और खुशी भी बहूत;
-तुषार
हमसफ़र...
वक्त हंसा , और देखो हम भी ...
वक्त ठहरा , और यारो हम भी ...
चला जो वक्त , तो मगन हम भी ...
ज़िन्दगी का सफर और कई मोड़ भी ...
कदम और वक्त एक हमसफ़र भी ...
-तुषार
वक्त ठहरा , और यारो हम भी ...
चला जो वक्त , तो मगन हम भी ...
ज़िन्दगी का सफर और कई मोड़ भी ...
कदम और वक्त एक हमसफ़र भी ...
-तुषार
Tuesday, September 22, 2009
रात...
कुछ अज़ब फैलाव है ,
कुछ अज़ब सा ठहराव,
कुछ रुकी खामोशी,
कुछ बस बहता अँधेरा ;
कुछ ऐसा है रात का आगोश ,
जैसे बस कोई ख्याल हों फैला ,
हर कुछ जैसे बस खो सा गया है ,
बस एक रंग में सर्द राख सा बना ;
इसी ठहराव में चलता है कोई,
इसी खामोशी में होती है कुछ बातें ,
इसी अंधेरे से मिलता है वो उजाला ,
जहाँ मिलता हूँ मैं
मुझसे
मेरे सपनो में...
-तुषार
कुछ अज़ब सा ठहराव,
कुछ रुकी खामोशी,
कुछ बस बहता अँधेरा ;
कुछ ऐसा है रात का आगोश ,
जैसे बस कोई ख्याल हों फैला ,
हर कुछ जैसे बस खो सा गया है ,
बस एक रंग में सर्द राख सा बना ;
इसी ठहराव में चलता है कोई,
इसी खामोशी में होती है कुछ बातें ,
इसी अंधेरे से मिलता है वो उजाला ,
जहाँ मिलता हूँ मैं
मुझसे
मेरे सपनो में...
-तुषार
पलछिन
ज़िन्दगी आइना है रूह का मेरी ,
सवारते रहते है लिबास कई ;
अनजान कोई हर सुबह मिलता है !
वो सडको पे बरसता है ,
रात में थके साए कई ;
चाँद तो दिन मैं सोता है !
कहीं कोई रुक गया है झरना ,
मोती फिर भी मिलते है वही ;
क्या कोई हार टूटा है !
किताब की धूल झाड़ दी हमने ,
नए फूल गुलदस्ते में सही;
क्या यादो को कबाडी लेता है !
रात में तनहा नहीं, दिन में है ,
कहो मिजाज़ यह क्या कहता है ;
रोशन तारे है , पर टिमटिमाते ही है !
-तुषार
सवारते रहते है लिबास कई ;
अनजान कोई हर सुबह मिलता है !
वो सडको पे बरसता है ,
रात में थके साए कई ;
चाँद तो दिन मैं सोता है !
कहीं कोई रुक गया है झरना ,
मोती फिर भी मिलते है वही ;
क्या कोई हार टूटा है !
किताब की धूल झाड़ दी हमने ,
नए फूल गुलदस्ते में सही;
क्या यादो को कबाडी लेता है !
रात में तनहा नहीं, दिन में है ,
कहो मिजाज़ यह क्या कहता है ;
रोशन तारे है , पर टिमटिमाते ही है !
-तुषार
याद..
कुछ भी तो याद नहीं
ना बीते पल, ना गुजरे लम्हे
क्या यादो को बक्से में बंद कर दिया है
या कुछ यादगार था ही नहीं ...
-तुषार
ना बीते पल, ना गुजरे लम्हे
क्या यादो को बक्से में बंद कर दिया है
या कुछ यादगार था ही नहीं ...
-तुषार
Sunday, August 30, 2009
...दो
अगर खवाब है तो खवाब ही रहने दो,
जितनी मिलती है ज़िन्दगी, उससे मुझे मिलने दो ।
जाग कर भी अगर ना मिल सको तुमसे ,
मुझे मेरे फरिस्ते फिर बस सोने दो ।
रेत का एक ज़ज्बात है खड़ा साहिल पर ,
लहरों में डूब उसे भी मोती बनने दो ।
एक चाँद ने अकेले कई रात यू काटी है ,
अब तो 'कबिर' उसे भी एक सितारा होने दो ।
चला है साथ ज़माने से ज़माने तक,
शाम के संग उसे यूँ बेबाक आजाद मत होने दो ।
Tuesday, August 04, 2009
... Tired...
I am afraid of people, yet tired being alone,
Can’t see anything coming, forgotten all gone;
My mind is not awake, my body doesn’t sleep,
Tired of promises that I had and have to keep;
I work for days and days to reach there,
But the map seems to be left somewhere;
I am tired of being alive as fellow dead,
One who missed all to earn daily his bread;
I am tired of the love and hate by all,
Which is always lost to tears at nightfall … -Tushar
Can’t see anything coming, forgotten all gone;
My mind is not awake, my body doesn’t sleep,
Tired of promises that I had and have to keep;
I work for days and days to reach there,
But the map seems to be left somewhere;
I am tired of being alive as fellow dead,
One who missed all to earn daily his bread;
I am tired of the love and hate by all,
Which is always lost to tears at nightfall … -Tushar
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