जाम लिए हाथ में न कहो ऐ दिल,
लफ्ज़ वो तेरे अनसुने होगे;
दिलो का खेल और दस्तूर एक,
तेरी ज़मीन पर चंद अश्क ही होगे;
न हो बेपर्दा और न ही किताब,
कुछ दर्द बहे तो बस लुत्फ़ होगे;
तू भी परख मुझे, और मैं भी, मालिक,
कभी तो तेरे लिए हम भी इंसान होगे;
दे गए आराम कुछ पल बैठ कर,
और कितने दोस्ती के क़र्ज़ होगे;
-तुषार
Friday, November 27, 2009
Saturday, November 21, 2009
luck
कुछ करते रहे हम, कुछ मुकुँदर ने किए काम,
दिल में रहे वो पर घर किसी के नाम ...
This seeme to be complete thought but cannot complete the lines ...may be later.
-Tushar
दिल में रहे वो पर घर किसी के नाम ...
This seeme to be complete thought but cannot complete the lines ...may be later.
-Tushar
winter
The fog with the wind
the shiver along the moon
comes the night whispering in ear
oh dear ! see the change, winter is here.
-Tushar
the shiver along the moon
comes the night whispering in ear
oh dear ! see the change, winter is here.
-Tushar
have ...have not ...
I have car
I have time
But no company to be called mine
I have smile
I have words
But nothing seem to be heard
I have dreams
I have nights
But no moon there to light
I have eyes
I have tears
But no loss of fear
-Tushar
I have time
But no company to be called mine
I have smile
I have words
But nothing seem to be heard
I have dreams
I have nights
But no moon there to light
I have eyes
I have tears
But no loss of fear
-Tushar
Sunday, November 01, 2009
सुबह
आज सुबह कोई ख्वाब न था …
…था तो बस एक प्यारा सुकून
पता नहीं क्यों …बस अजब गीली हँसी से
पहली बार साथ आज शायद वो ख्याल भी उठा है
-तुषार
…था तो बस एक प्यारा सुकून
पता नहीं क्यों …बस अजब गीली हँसी से
पहली बार साथ आज शायद वो ख्याल भी उठा है
-तुषार
Saturday, October 24, 2009
इंतज़ार ....
न जाने लफ्ज़ कहाँ गुम हो गए,
नाम लिखने के बाद ...
कुछ भी न लिख सका उस चेहरे की कर याद ...
खली ख़त ही भेज दिया जाने किस उम्मीद के साथ ...
हर जवाब तुम हो ...आज भी है इंतज़ार ...
-कबीर का दोस्त
नाम लिखने के बाद ...
कुछ भी न लिख सका उस चेहरे की कर याद ...
खली ख़त ही भेज दिया जाने किस उम्मीद के साथ ...
हर जवाब तुम हो ...आज भी है इंतज़ार ...
-कबीर का दोस्त
ऐसे ही ...एक ख्याल
चोखट खुली आज भी है ,
आँख कुछ सुनी भी ,
घड़ी का वक्त वही है,
जहाँ शुरु हुआ था ये इंतज़ार भी ,
किताब मैं कहीं पत्ते सूखे है ,
धूल पड़ी है आईने पर ,
और कुछ बूँदें आँगन में...
...बस बरस रही है ,
दूर उसी सुखी चोखट से...
-तुषार
आँख कुछ सुनी भी ,
घड़ी का वक्त वही है,
जहाँ शुरु हुआ था ये इंतज़ार भी ,
किताब मैं कहीं पत्ते सूखे है ,
धूल पड़ी है आईने पर ,
और कुछ बूँदें आँगन में...
...बस बरस रही है ,
दूर उसी सुखी चोखट से...
-तुषार
तमन्ना ....
न इंतज़ार कोई , न है बेबसी सी
कहीं बस ख्याल उनका कुछ गुदगुदा जाता है
वो कहे न कहे कुछ हमसे , तो क्या ?
किसी तमन्ना से दिल फिर भी मुस्कुरा जाता है...
-तुषार
कहीं बस ख्याल उनका कुछ गुदगुदा जाता है
वो कहे न कहे कुछ हमसे , तो क्या ?
किसी तमन्ना से दिल फिर भी मुस्कुरा जाता है...
-तुषार
परख ...
खुश वो तो हो मैं भी
पर कब तक बस उनके लिए
परख उनको भी ऐ मेरे मालिक
बख्श उन्हें भी हँसी मेरी
-तुषार
पर कब तक बस उनके लिए
परख उनको भी ऐ मेरे मालिक
बख्श उन्हें भी हँसी मेरी
-तुषार
Monday, September 28, 2009
bye bye Jerry
Why we say good byes?
With a smile and wet eyes
Loads of wishes few said
Lot of feeling left unsaid
For wonderful journey you have
For a life you want to carve
For moments to be unfolded
For new stature to be molded
I would not say, no byes
There will be no wet eyes
Just a sweet little smile
As you head to new mile
No parting gift no farewell game
Just a promise, as I add a name
Into my life, a relation not to wane
You will live in life’s memory lane
Why we say good byes?
With smile with wet eyes
For wonderful journey you have
For a life you want to carve…
-Tushar
PS: I posted it almost after a year. Jerry left Aricent in Oct 2008
With a smile and wet eyes
Loads of wishes few said
Lot of feeling left unsaid
For wonderful journey you have
For a life you want to carve
For moments to be unfolded
For new stature to be molded
I would not say, no byes
There will be no wet eyes
Just a sweet little smile
As you head to new mile
No parting gift no farewell game
Just a promise, as I add a name
Into my life, a relation not to wane
You will live in life’s memory lane
Why we say good byes?
With smile with wet eyes
For wonderful journey you have
For a life you want to carve…
-Tushar
PS: I posted it almost after a year. Jerry left Aricent in Oct 2008
Saturday, September 26, 2009
what if ...
हर सपने का आगाज़ है एक ‘अगर’,
‘अगर’ यह हो तो बस होगा क्या ?
पर उसी का अंत होता है एक ‘मगर’,
मगर उन सपनो से ज़िन्दगी चलती है क्या ?
*********************************************
Every dream starts with “what if”
“what if “ it gets a form of being real
And then it concludes into being real
A reality that leaves only the “what if “ …
-Tushar
‘अगर’ यह हो तो बस होगा क्या ?
पर उसी का अंत होता है एक ‘मगर’,
मगर उन सपनो से ज़िन्दगी चलती है क्या ?
*********************************************
Every dream starts with “what if”
“what if “ it gets a form of being real
And then it concludes into being real
A reality that leaves only the “what if “ …
-Tushar
अगर...मगर...
जिंदगी ‘अगर’ में जी लेते तो सही,
जहाँ में ‘मगर ’ होगे बहूत ;
वो साथ तो होगे हर वक्त,
तनहा पल फिर भी होगे बहूत;
कहीं कोहरे को बदल समझ बैठे,
बहना चाहते थे साथ हम भी ‘मगर’;
छट गई धुंध और खड़े रह गए दरख्त,
सालो से जैसे किसी का इंतज़ार हो बहूत ;
जिंदगी खड़ी थी उस मोड़ पर वहां,
रास्ता सीधा पहूचता था ‘मगर’,
एक काफिर ने राह यूँ मोड़ दी है कि ,
मंजिल नज़र से दूर हुई है बहूत;
अपने होने का सबब पूछ बैठा आंसू,
कह न पाए हम उस लगी को ‘मगर’,
बहा है अपने ही लहू से वो भी,
दर्द भी है, और खुशी भी बहूत;
-तुषार
जहाँ में ‘मगर ’ होगे बहूत ;
वो साथ तो होगे हर वक्त,
तनहा पल फिर भी होगे बहूत;
कहीं कोहरे को बदल समझ बैठे,
बहना चाहते थे साथ हम भी ‘मगर’;
छट गई धुंध और खड़े रह गए दरख्त,
सालो से जैसे किसी का इंतज़ार हो बहूत ;
जिंदगी खड़ी थी उस मोड़ पर वहां,
रास्ता सीधा पहूचता था ‘मगर’,
एक काफिर ने राह यूँ मोड़ दी है कि ,
मंजिल नज़र से दूर हुई है बहूत;
अपने होने का सबब पूछ बैठा आंसू,
कह न पाए हम उस लगी को ‘मगर’,
बहा है अपने ही लहू से वो भी,
दर्द भी है, और खुशी भी बहूत;
-तुषार
हमसफ़र...
वक्त हंसा , और देखो हम भी ...
वक्त ठहरा , और यारो हम भी ...
चला जो वक्त , तो मगन हम भी ...
ज़िन्दगी का सफर और कई मोड़ भी ...
कदम और वक्त एक हमसफ़र भी ...
-तुषार
वक्त ठहरा , और यारो हम भी ...
चला जो वक्त , तो मगन हम भी ...
ज़िन्दगी का सफर और कई मोड़ भी ...
कदम और वक्त एक हमसफ़र भी ...
-तुषार
Tuesday, September 22, 2009
रात...
कुछ अज़ब फैलाव है ,
कुछ अज़ब सा ठहराव,
कुछ रुकी खामोशी,
कुछ बस बहता अँधेरा ;
कुछ ऐसा है रात का आगोश ,
जैसे बस कोई ख्याल हों फैला ,
हर कुछ जैसे बस खो सा गया है ,
बस एक रंग में सर्द राख सा बना ;
इसी ठहराव में चलता है कोई,
इसी खामोशी में होती है कुछ बातें ,
इसी अंधेरे से मिलता है वो उजाला ,
जहाँ मिलता हूँ मैं
मुझसे
मेरे सपनो में...
-तुषार
कुछ अज़ब सा ठहराव,
कुछ रुकी खामोशी,
कुछ बस बहता अँधेरा ;
कुछ ऐसा है रात का आगोश ,
जैसे बस कोई ख्याल हों फैला ,
हर कुछ जैसे बस खो सा गया है ,
बस एक रंग में सर्द राख सा बना ;
इसी ठहराव में चलता है कोई,
इसी खामोशी में होती है कुछ बातें ,
इसी अंधेरे से मिलता है वो उजाला ,
जहाँ मिलता हूँ मैं
मुझसे
मेरे सपनो में...
-तुषार
पलछिन
ज़िन्दगी आइना है रूह का मेरी ,
सवारते रहते है लिबास कई ;
अनजान कोई हर सुबह मिलता है !
वो सडको पे बरसता है ,
रात में थके साए कई ;
चाँद तो दिन मैं सोता है !
कहीं कोई रुक गया है झरना ,
मोती फिर भी मिलते है वही ;
क्या कोई हार टूटा है !
किताब की धूल झाड़ दी हमने ,
नए फूल गुलदस्ते में सही;
क्या यादो को कबाडी लेता है !
रात में तनहा नहीं, दिन में है ,
कहो मिजाज़ यह क्या कहता है ;
रोशन तारे है , पर टिमटिमाते ही है !
-तुषार
सवारते रहते है लिबास कई ;
अनजान कोई हर सुबह मिलता है !
वो सडको पे बरसता है ,
रात में थके साए कई ;
चाँद तो दिन मैं सोता है !
कहीं कोई रुक गया है झरना ,
मोती फिर भी मिलते है वही ;
क्या कोई हार टूटा है !
किताब की धूल झाड़ दी हमने ,
नए फूल गुलदस्ते में सही;
क्या यादो को कबाडी लेता है !
रात में तनहा नहीं, दिन में है ,
कहो मिजाज़ यह क्या कहता है ;
रोशन तारे है , पर टिमटिमाते ही है !
-तुषार
याद..
कुछ भी तो याद नहीं
ना बीते पल, ना गुजरे लम्हे
क्या यादो को बक्से में बंद कर दिया है
या कुछ यादगार था ही नहीं ...
-तुषार
ना बीते पल, ना गुजरे लम्हे
क्या यादो को बक्से में बंद कर दिया है
या कुछ यादगार था ही नहीं ...
-तुषार
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