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Friday, June 18, 2021
प्रेम नगरिया श्याम बुलायो ...
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होने ...देते है!
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श्याम बिना सूनी है सारी बतियाँ
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अभी बाकी है !
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एक इंसान हूँ मैं ?
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ज़िन्दगी ...
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गुमनामी
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ढल रहा ...
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वादा...
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साँस ...चाँद ...
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वो साथ गुज़ारी शामों के ...
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सैलाब
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देखो मुझे बड़ा होना अच्छा नहीं लगता
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न करो ...
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बिना ख़बर...
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देता हूँ !
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...सराय ...
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समाचार
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...ज़िन्दगी ...
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दी है !
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...अज्ञानी ...ज्ञानी ...
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...बूँद ...
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...हैरान ...
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...देखो ...
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...की है !
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...याद ...
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रोया नहीं उस रात...
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मैं फिरो वृंदावन धाम !
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Thursday, December 29, 2016
...शायद बारिश हो रही है...
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Wednesday, November 30, 2016
...था...
आज फिर बरस गया
आज फिर भीग गया
कागज़ सा एक खवाब था ...
आज फिर कह गया
आज फिर सह गया
पत्थर सा एक आदम था...
आज फिर हंस गया
आज फिर बह गया
आईने सा एक चेहरा था...
आज फिर रुक गया
आज फिर ठहर गया
सोच सा एक दर्द था ...
आज फिर मिल गया
आज फिर खिल गया
ओस सा रिश्ता था ...
-तुषार

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...आइना ...

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...तलाश ...

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...साँस..याद
-तुषार

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...सफर ...

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...लम्हे ...
-तुषार

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...पल ...
तब जब तन्हाई भिखरी बारिश हो जाये
-तुषार

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...ख़ज़ाने...
-तुषार
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...अपील ...
अज़ीब कशमकष है...
दिल भरा है, पर सब खाली...
कोई हैरानी नही न कोई दिवानगी...
दर्द छूट गया खुशी बीत गई...
रास्ता ठहरा है हम भागते कही....
कोई बस कर दे बदं पलक आके...
दुशमन न हो दोस्त ही सही..
-तुषार
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...बदल जायेगा
चीखती सी खामोश सफेदी
....
-तुषार

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...चाहता हूं ...
-तुषार

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Sunday, July 07, 2013
यथार्थ
ज़िन्दगी से भाग के कहाँ जायेगा तू ,
यह पल अगर तेरा कर्म है तो पीले इसे ,
अगर नहीं तो भी जी ले इसे ,
पानी यह आंसू है या मोती ?
यह तो वक़्त की रफ़्तार के साथ ही बस जान पायेगा तू
-तुषार
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Monday, June 18, 2012
तलाश ...
दिन कई जैसे जोड़ रहा हूँ ,
रिश्ते जाने बस छूट गए है,
या मैं अनजाने पीछे रह गया हूँ .
वो क्या था क्या है पिघलता सा,
सच और झूठ मैं ढूँढ रहा हूँ ,
मैं और मैं कि तस्वीर को ले कर,
अपना सा वो आइना ढूँढ रहा हूँ;
भाग रहा था वो भी , शाम वही मिल जाता था,
बस उस बत्ति का मिलना था, कार से दिख जाता था,
कहाँ जाता था कहाँ से आता, पुछा नहीं कभी,
उलझा हूँ इतना , जाने किस तलाश को दूंध रहा हूँ
-तुषार
Friday, February 03, 2012
कई बार ...
कई बार
उठ कर चलते हुए , गिरकर उसे
उस रास्ते पर चलते उसे
इस रास्ते पर ठहर सुस्ताते हुए
हाफ्ते थकते रुकते , कई बार
कई बार , भागते हुए
देखा है , अपनी ही आखों से ,
कई बार ....
सफ़र है या मंजिल
पड़ाव थे या जहन से गिरे पत्ते ...
सब को पीछे छोड़ते हुए
कभी बारिश में भीगते खड़े हुए
कई बार ...देखा है ...बस ऐसे ही...कई बार ...
और आज ...
देख रहा हू, पर कह नहीं सकता
अंत है या आगाज़ , किसी या उसी सफ़र का
उसे अपनों के द्वारा जलाते हुए ...
देखा है ...
कई बार...पर आज ..शायद ...आखिर बार ...जलते जलाते देखा है ...
-तुषार
Monday, December 12, 2011
ज़िन्दगी को कई बार आखँ बंद कर देखा है हमने...
ज़िन्दगी को कई बार आखँ बंद कर देखा है हमने ...कभी खुद के लिए कभी बस यूही कुछ कहा है हमने,
तलाश रहे थे सहारा बेसहारो की भरी नगरी में,
कई बार खुद को खुद से हारते देखा है हमने ;
ज़िन्दगी को कई बार आखँ बंद कर देखा है हमने...
चाह थी एक मामूली आराम की बस आम सी,
कभी थके खुद, पर उनको आराम देते देखा है हमने;
ज़िन्दगी को कई बार आखँ बंद कर देखा है हमने...
आज उनको देख जलन होती नहीं, खुशी भी नहीं,
कई सिलसिलो को गुजरते जाते देखा है हमने;
ज़िन्दगी को कई बार आखँ बंद कर देखा है हमने...
-तुषार
Monday, November 21, 2011
सपना...

हर राह अपनी है अगर मंजिल का पता नहीं,
वो ज़िन्दगी बस सपना है जिसे हकीक़त की हवा नहीं;
कई पल छाने कई लम्हे टटोले होंगे,
वो बीत गया क्या , जिसे याद की सजा नहीं;
लफ्ज़ तोले है कई बार ज़माने ने तेरे,
वो कहानी ही क्या, जिसे झूठ की परवाह नहीं;
एक ही घर से निकले सब राही , हमकदम नहीं,
मिलेंगे फिर,कोई ख्याल इंसान से जुदा तो नहीं;
-तुषार
Friday, October 21, 2011
...आँचल...
क्या माँ के आँचल को छू सकता हूँ...
कुछ थक सा गया हूँ , क्या माँ कि गोद में सो सकता हूँ...
कहते है बड़ा हूँ गया है अब 'कबीर' ...
पर क्या कुछ पल के लिए माँ का चंदा बन सकता हूँ ?
-तुषार
Wednesday, October 19, 2011
...घर...
कहीं थोड़ी सीलन , कहीं चोबे उतारी तस्वीरो के
कुछ दरवाज़े खुले , कमरों के, कुछ चेहरे खाली आइनों के
कुछ बाँध लिया पेटी में, कुछ पीछे रह सिक्के दादू के...
-तुषार
Tuesday, October 18, 2011
Friday, July 29, 2011
???
वोह न रुकता है वो न थमता है, पर कभी वो थका भी दिखता है ...
जो मिला वो कभी चाह नहीं, जो चाहा वो कभी मिला नहीं,
मेरी ज़िन्दगी की किताब को जाने कौन लिखता है ...
मेरी दिल के आरजोयो में अब कहीं कोई नाम नहीं ,
जो थे वो कहीं मिट गए, नए अब मैं बस लिखता नहीं...
-तुषार
Wednesday, July 27, 2011
आज फिर ...था.....
आज फिर भीग गया
कागज़ सा एक खवाब था ...
आज फिर कह गया
आज फिर सह गया
पत्थर सा एक आदम था...
आज फिर हंस गया
आज फिर बह गया
आईने सा एक चेहरा था...
आज फिर रुक गया
आज फिर ठहर गया
सोच सा एक दर्द था ...
आज फिर मिल गया
आज फिर खिल गया
ओस सा रिश्ता था ...
-तुषार
Tuesday, June 07, 2011
कहानी और सच...
पर दादा-दादी ने बोला झूठ था मुझे,
न होती है परी, न होता है हातिम ...
कुछ मगर सचाई उन कहानी में भी थी,
शैतान से डर तब भी लगता था मुझे,
चाँद उनमे भी बस मुस्कुराता था हसीन...
ज़िन्दगी है ये और कहानी रही वोह थी,
वहां सुकून राजकुमारी, 'कबीर' यहाँ मिला मुझे,
सचाई के दिन, सपने की बातें फैली यही कहीं ...
-तुषार
Sunday, May 29, 2011
..दर्द..
सवाल अब कोई पूछे नहीं जाते तुझसे ,
ज़िन्दगी इस शर्त पर ही तो मिले है हमे;
कुछ था ही नहीं मेरा पास मेरे , जो तू ले गया ,
किस्मत शायद तेरी , खुदा ने बक्श दी थी हमे;
मुस्कराहट की रौशनी है लबो पे सबकी ,
दर्द रातों को ही तो बस जगाता है हमे;
कुछ रिश्ते बड़े महगे हुए ‘कबीर ’ तेरे ,
रोये वोह तो उनकी कीमत पता चली हमे ;
On valentine day rose killing :
गुलाब बिछड़े कई अपनों से , महकाए कई चेहरे ,
कुछ ऐसे ही खुद के लिए , ज़माने ने अपनाया है हमे
-तुषार
मेरे तीन प्यारो के लिए ...
पत्थर हुआ नहीं ,थोड़ी नमी शायद बाकी है ;
नन्ही हंसी आज भी कभी युही धुंधली हो जाती है ;
-तुषार
...अन्त
आज तनहा कुछ ऐसे है की तन्हाई भी न मिले;
जिस शहर की रौनक से थे हम खेला कभी किये,
वोह बस्ती आज अनजान बेगानों सी है मिले ...
-तुषार
जज्बात ...
1. ”ऐसा नहीं की अपनी कोई कहानी नहीं
लफ्ज़ अपने बस बक्श दिए है हमने ”-
2. "ज़िन्दगी तुने बहूत कुछ दीया है हमे ,
हंसी हमारी शायद हमसे ही खो गयी है "
3. "तन्हाई की भी खुदा अजब रौनक है,
किसी की भी कहानी का हिस्सा नहीं हम,
सब चल रहे है सोचकर बस ये 'कबीर'
चाँद मिला तो सितारे खोने का क्या है गम"
-तुषार
Wednesday, July 21, 2010
...सपना...
सपनो में हूँ रहता , ज़िन्दगी हकीक़त सी लगती है ,
खवाइश आसमान तक फैली है , धुंद ज़रा सी ठहरी है;
कहाँ बादल घुमड़े है , और कहाँ बूँद सी भिखरी है,
रास्ते चुप चाप राह पर चलते है , मंजिल पीछे बैठी है;
सुकून है कुछ दर्द का, कहीं बर्फ आग से पिघली है ,
कुछ किरने पानी पर सोती है , गुलाबी सी रंगीनी है,
चाँद अभी पका नहीं, चांदनी अभी बोनी है
-तुषार
Sunday, June 06, 2010
...सका
दोस्त कहाँ था तुझे कभी , आज कुछ कर/कह न सका ;
मुसाफिर हूँ , शहर या बस्ती नहीं ,
तू साथ चल न सका , में पास रुक न सका ;
हर पते से पुछा है पता ,
किसी दरवाज़े पे खुद से मिल न सका ;
पीपल वो मेरा रूठ गया , सूख गया ,
ज़िन्दगी से बड़ा कोई रिश्ता जी न सका ;
हारा हो , माना है , पर जुर्म बस इतना है ,
तकदीर का अपना बस कभी हो न सका ;
-तुषार
...तनहा...
भीड़ है कितनी दुनिया में , पर हर पल तनहा मिलता है
-तुषार
तन्हाई
चाँद मिलेगा फिर भी रात तनहा होगी
इंतज़ार तेरा ज़माने से बगावत होगा
तुझसे वफ़ा , खुदा से बेवफाई होगी
ज़िन्दगी मेरी मेरे हाथों में ही तो है
लकीरों में दास्ताँ हर पल की छुपी होगी
क़र्ज़ उठाये है मुस्कराहट के बेहिसाब
कभी तो नज़र कोई कहीं हमकदम होगी
मुख़्तसर से रिश्ते और फलसफे -ए -ज़िन्दगी ,
कारवां से मिले फिर भी तन्हाई संग होगी
-तुषार
...होंगे
लफ्ज़ वो तेरे भी अनसुने होंगे ;
दिलो का खेल है और दस्तूर एक ,
तेरी ज़मीन पर चंद अशक ही होंगे ;
न हो बेपर्दा और न ही किताब ,
कुछ दर्द बहे तो बस लुत्फ़ होंगे ;
दे इजाज़त मोहबत करने की मुझे ,
मेरे गुनाह कई फिर तुझे बक्शने होंगे ;
तू भी परख मुझे , और मैं भी , मालिक ,
कभी तो तेरे लिए हम भी इंसान होंगे ;
/*This is a stolen but felt thought */
दे गए आराम कुछ पल बैठ कर ,
और कितने दोस्ती के क़र्ज़ होंगे ;
-तुषार
Wednesday, January 20, 2010
...शाम...
Sunday, January 17, 2010
शिकवा ...
खवाब टूटने की खबर अजनबियों ने दी मुझे
ऐ ज़िन्दगी तूने इतना भी अपना न समझा मुझे
गेंरो ने सुना नहीं, कहानी अपनों से कह न सके
अश्क और लब बस अब जुड़वाँ लगते है मुझे
दर्द से उनके दर्द हुआ कम मेरा, आदम हूँ
क्यों हंसी , 'कबीर', सुकून दे न सकी मुझे
कई रिश्ते बस खामोश छोड़ दिए यूही
और कई जवाब कभी मिले न मुझे
******************************************
शिकवे और सवाल तो ज़िन्दगी को दिए मैंने
ज़िन्दगी ने तो बस 'ज़िन्दगी' दी है मुझे
*******************************************
-तुषार
Tuesday, January 05, 2010
समर्पण ...
सब कुछ शांत सा हो गया है
कोई लगाव न ही कोई बिछोह
सब रात सा हो गया है
न न रात नहीं , वहां तो रोशनी है अँधेरे की
तो शायद होगा ये पतझड़ का सावन
वो भी नहीं
वोह भी तो मौसम है
है बस एक खालीपन , हाँ एक खालीपन
पर ..., पता नहीं
पर क्या महसूस होता है ?
कुछ भी नहीं , सूनापन भी नहीं
क्या सो गया है , यहाँ
जहाँ हकीकत सपनो से मिलती नहीं
और सपने हकीकत से उगते नहीं ...
यह बस शान्ति है ...
अपने को पाने की
और पा के बस जैसे
सब
समर्पित हो गया है ....
-तुषार
Friday, December 25, 2009
अक्स...
सिर्फ लफ्जों से अश्क नहीं रोते,
वो है हमारे ,तो क्या है नहीं वो ?
अक्स है, दिल में इन्सान नहीं सोते ।
-तुषार
PS: Time was running and I wanted to write something as an entry for December month, as only this year I have post for all months, now completed by 'Aks'. But I know this is just to fill December's blank , but what to do there were no real thoughts in December.
Friday, November 27, 2009
होंगे...
लफ्ज़ वो तेरे अनसुने होगे;
दिलो का खेल और दस्तूर एक,
तेरी ज़मीन पर चंद अश्क ही होगे;
न हो बेपर्दा और न ही किताब,
कुछ दर्द बहे तो बस लुत्फ़ होगे;
तू भी परख मुझे, और मैं भी, मालिक,
कभी तो तेरे लिए हम भी इंसान होगे;
दे गए आराम कुछ पल बैठ कर,
और कितने दोस्ती के क़र्ज़ होगे;
-तुषार
Saturday, November 21, 2009
luck
दिल में रहे वो पर घर किसी के नाम ...
This seeme to be complete thought but cannot complete the lines ...may be later.
-Tushar
winter
the shiver along the moon
comes the night whispering in ear
oh dear ! see the change, winter is here.
-Tushar
have ...have not ...
I have time
But no company to be called mine
I have smile
I have words
But nothing seem to be heard
I have dreams
I have nights
But no moon there to light
I have eyes
I have tears
But no loss of fear
-Tushar
Sunday, November 01, 2009
सुबह
…था तो बस एक प्यारा सुकून
पता नहीं क्यों …बस अजब गीली हँसी से
पहली बार साथ आज शायद वो ख्याल भी उठा है
-तुषार
Saturday, October 24, 2009
इंतज़ार ....
नाम लिखने के बाद ...
कुछ भी न लिख सका उस चेहरे की कर याद ...
खली ख़त ही भेज दिया जाने किस उम्मीद के साथ ...
हर जवाब तुम हो ...आज भी है इंतज़ार ...
-कबीर का दोस्त
ऐसे ही ...एक ख्याल
तमन्ना ....
कहीं बस ख्याल उनका कुछ गुदगुदा जाता है
वो कहे न कहे कुछ हमसे , तो क्या ?
किसी तमन्ना से दिल फिर भी मुस्कुरा जाता है...
-तुषार
परख ...
पर कब तक बस उनके लिए
परख उनको भी ऐ मेरे मालिक
बख्श उन्हें भी हँसी मेरी
-तुषार
Monday, September 28, 2009
bye bye Jerry
With a smile and wet eyes
Loads of wishes few said
Lot of feeling left unsaid
For wonderful journey you have
For a life you want to carve
For moments to be unfolded
For new stature to be molded
I would not say, no byes
There will be no wet eyes
Just a sweet little smile
As you head to new mile
No parting gift no farewell game
Just a promise, as I add a name
Into my life, a relation not to wane
You will live in life’s memory lane
Why we say good byes?
With smile with wet eyes
For wonderful journey you have
For a life you want to carve…
-Tushar
PS: I posted it almost after a year. Jerry left Aricent in Oct 2008
Saturday, September 26, 2009
what if ...
‘अगर’ यह हो तो बस होगा क्या ?
पर उसी का अंत होता है एक ‘मगर’,
मगर उन सपनो से ज़िन्दगी चलती है क्या ?
*********************************************
Every dream starts with “what if”
“what if “ it gets a form of being real
And then it concludes into being real
A reality that leaves only the “what if “ …
-Tushar
अगर...मगर...
जहाँ में ‘मगर ’ होगे बहूत ;
वो साथ तो होगे हर वक्त,
तनहा पल फिर भी होगे बहूत;
कहीं कोहरे को बदल समझ बैठे,
बहना चाहते थे साथ हम भी ‘मगर’;
छट गई धुंध और खड़े रह गए दरख्त,
सालो से जैसे किसी का इंतज़ार हो बहूत ;
जिंदगी खड़ी थी उस मोड़ पर वहां,
रास्ता सीधा पहूचता था ‘मगर’,
एक काफिर ने राह यूँ मोड़ दी है कि ,
मंजिल नज़र से दूर हुई है बहूत;
अपने होने का सबब पूछ बैठा आंसू,
कह न पाए हम उस लगी को ‘मगर’,
बहा है अपने ही लहू से वो भी,
दर्द भी है, और खुशी भी बहूत;
-तुषार
Tuesday, September 22, 2009
रात...
कुछ अज़ब सा ठहराव,
कुछ रुकी खामोशी,
कुछ बस बहता अँधेरा ;
कुछ ऐसा है रात का आगोश ,
जैसे बस कोई ख्याल हों फैला ,
हर कुछ जैसे बस खो सा गया है ,
बस एक रंग में सर्द राख सा बना ;
इसी ठहराव में चलता है कोई,
इसी खामोशी में होती है कुछ बातें ,
इसी अंधेरे से मिलता है वो उजाला ,
जहाँ मिलता हूँ मैं
मुझसे
मेरे सपनो में...
-तुषार
पलछिन
सवारते रहते है लिबास कई ;
अनजान कोई हर सुबह मिलता है !
वो सडको पे बरसता है ,
रात में थके साए कई ;
चाँद तो दिन मैं सोता है !
कहीं कोई रुक गया है झरना ,
मोती फिर भी मिलते है वही ;
क्या कोई हार टूटा है !
किताब की धूल झाड़ दी हमने ,
नए फूल गुलदस्ते में सही;
क्या यादो को कबाडी लेता है !
रात में तनहा नहीं, दिन में है ,
कहो मिजाज़ यह क्या कहता है ;
रोशन तारे है , पर टिमटिमाते ही है !
-तुषार
याद..
ना बीते पल, ना गुजरे लम्हे
क्या यादो को बक्से में बंद कर दिया है
या कुछ यादगार था ही नहीं ...
-तुषार
Sunday, August 30, 2009
...दो
अगर खवाब है तो खवाब ही रहने दो,
जितनी मिलती है ज़िन्दगी, उससे मुझे मिलने दो ।
जाग कर भी अगर ना मिल सको तुमसे ,
मुझे मेरे फरिस्ते फिर बस सोने दो ।
रेत का एक ज़ज्बात है खड़ा साहिल पर ,
लहरों में डूब उसे भी मोती बनने दो ।
एक चाँद ने अकेले कई रात यू काटी है ,
अब तो 'कबिर' उसे भी एक सितारा होने दो ।
चला है साथ ज़माने से ज़माने तक,
शाम के संग उसे यूँ बेबाक आजाद मत होने दो ।
Tuesday, August 04, 2009
... Tired...
Can’t see anything coming, forgotten all gone;
My mind is not awake, my body doesn’t sleep,
Tired of promises that I had and have to keep;
I work for days and days to reach there,
But the map seems to be left somewhere;
I am tired of being alive as fellow dead,
One who missed all to earn daily his bread;
I am tired of the love and hate by all,
Which is always lost to tears at nightfall … -Tushar
Thursday, July 23, 2009
...देता हूँ
सब के लिए ख़ुद को भूला देता हूँ;
ज़र्रे-ज़र्रे बूटे में ढूँढा किए दिल,
तुझे अपने नाम की वजह देता हूँ;
वो भागते भूल गए चाँद से मिलना,
ए मुसाफिर तुझे तारो के रात देता हूँ;
मिल गए कभी जुदा हुए ए 'कबीर'
सपनो की कुछ ऐसे सच्चाई देता हूँ;
गिला नहीं, ढूँढा नहीं तुझे ए खुदा,
मालिक तुझे माँ का नाम देता हूँ;
राहगीर चलते गए, तलाश में कोई,
तुझे तेरा सा रहगुज़र देता हूँ;
-तुषार
Sunday, July 19, 2009
I will fight destiny’s odds...
Of rain on my window-step
I will fight destiny’s odds
untill sunshine smiles at my doorstep
I have woken through past nights
Eager to embrace, as a friend, the day
I will fight destiny’s odds
Till moonlight and love are my pay
I have walked under sunny ways
Watched the grass turn to hay
I will fight the destiny’s odds
Till I get the promised pastures and sun-kissed bays
I have woven dreams in the clouds
Watched the white vows turn grey
I will fight destiny’s odds
Till life-perfect I have, I would say
-Tushar, edited by Nilanjan
Wednesday, July 08, 2009
ज़िन्दगी ...?
वो बहा नहीं, तो क्या उसका कोई नाम नहीं ?
वो लकीरें है हाथो में और कुछ भी तो नहीं ,
वो जिन्दगी, कहीं मौत का एक अंदाज़ तो नहीं ?
-कबीर
Friday, June 12, 2009
...खुशी...गम...
वो खुशी तेरी थी, तेरी हुई, चली गई,
वो अशक मेरे थे, बहे फिर ठहर गए;
अब क्यों खुशी को बुलाये जो हुई पराई?
क्यों गम को सताए जो है बस हमसाये ?
-तुषार
Wednesday, June 10, 2009
...गम...दिल ...
तू गया, तेरा गम भी एक दिन यूँ चला जाएगा,
कोई कहाँ रुका है जो यह मौसम ठहर जाएगा
वो बरसा तो दिल भी कहीं गीला भीगा हो जाएगा
वो सूख गया तो दिल भी बस पत्थर हो जाएगा .
-तुषार
Wednesday, June 03, 2009
ये रात अकेली लगती है ...
वो चाँद तन्हा जगता है ;
न कोई अपना मिलता है ,
न कोई पराया दीखता है ;
वो दिन मैं चेहरे लड़ते है ,
और रात में डर सा लगता है ;
वो कहीं बिछडा जाता है ,
यह हाथ खाली रहता है ;
वो ऊचे मकान में जीता है ,
कहीं घर खाली बैठा है ;
यह आसमान को छुता है ,
बस तारो से बातें करता है ;
वो सर्द ईमारत में हँसता है ,
मौसम से अछुता रहता है ;
वोह दिनभर भागता रहता है ,
और बस इंतज़ार में जीता है ;
वो रोज़ कुछ पाता है ,
और ख़ुद खोता लगता है ;
कहाँ अब ख़ुद से मिलता है ,
कहाँ ख़ुद को जानता है ;
कुछ अधूरे सपनो को रोता है ,
और ज़िन्दगी से शिकायत करता है ;
ये रात अकेली लगती है ,
वो चाँद तन्हा जगता है ;
-तुषार
Monday, June 01, 2009
अन्त ...शुरुवात...
वही शुरुवात जो उस अन्त के लिए जन्मी थी ...
Every end is a conclusion of a new start,
The start which commenced for that very end…
-Tushar
Thursday, May 28, 2009
night & friend ...
I have befriended moon and stars,
Talking of love and daily little wars;
They are so far yet seen and felt so near,
They always listen with smile so clear;
With night they come, with me have a stay
Till I find my dreams, through goodnight way…
-Tushar
Wednesday, May 27, 2009
Light...
But I fail to see the thought inside my heart’s room,
Waiting for love’s light to enter and fill this room,
So my soul also will be the tree from other’s room;
Away from shadows, into the peace rain …
For light and love, for innocence to retain … -Tushar
Tuesday, May 26, 2009
...Sleepless..
I walk under the starry sky, woken and lone;
Hope the night was dark, off were lights on the lane;
In dreams I was, for the reason that night came;
-Tushar
Friday, May 22, 2009
...पता ही नहीं
न गम न खुशी कुछ भी जैसे साथ नहीं,
फिर भी क्यों अकेले बैठे यू ही कहीं,
मुस्कुराती कभी नम है आखें , पता ही नहीं ...
-तुषार